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आज ही छोड़ें दें अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाना, धीमा जहर नहीं, 32 रोग और मौत की हैं गारंटी

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अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड (यूपीएफ) यानी ऐसा पका-पकाया खाना, जिसका मूल पूरी तरह से बदल चुका हो। मसलन, मक्के के आटे से बने कॉर्न चिप्स, आलू चिप्स, केक, कुकीज, बिस्किट, नमकीन, मैगी, फ्रोजन फूड। ये फेरहिस्त बहुत लंबी हो जाएगी, लिहाजा अवधारणात्मक रूप से यह समझ लें कि, जब कच्चे भोजन को नमक, चीनी या किसी भी दूसरे मसाले के साथ मिलाकर पकाना प्रोसेस्ड फूड की श्रेणी में आता है। इसके बाद जब, खाने को पकाने के बाद इसे लंबे समय तक संरक्षित रखने के लिए इसे तला, भुना और सेका जाता है, तो ये अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की श्रेणी में आ जाता है।

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क्यों है खतरनाक


ऑस्ट्रेलिया की डीकिन यूनिवर्सिडी की शोधकर्ता डॉ. मेलिसा लेन और कई अन्य यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यूपीएफ पर हुए 14 बड़े शोध की समीक्षा की है। इन शोधों में 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की सेहत, खानपान, उनकी मौत और बीमारियों के बारे में डाटा जुटाया गया।  जब डॉ. लेन की टीम ने इन तमाम शोध के डाटा को एक साथ रखा, तो चौंकाने वाले नतीजे आए कि जो लोग लगातार यूपीएफ का सेवन कर रहे हैं, उनके हृदय संबंधी रोगों से मरने की आशंका 66 फीसदी तक बढ़ जाती है।

32 रोग और मौत की गारंटी का संबंध


लगातार यूपीएफ खाने से कैंसर और कार्डियोवास्कुलर डिजीज (सीवीडी) को दावत देना है और ये दोनों की दुनिया में मौत की सबसे बड़ी वजह हैं। यूपीएफ का ब्रेस्ट कैंसर, सेंट्रल नर्वस सिस्टम ट्यूमर, क्रॉनिक लिम्फोटिक ल्युकेमिया, कोलोरेक्टल कैंसर, पैंक्रियाटिक कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर से सीधा संबंध मिला है। इसके अलावा सीवीडी के लिहाज से हाईपरटेंशन, हाईपरट्राइग्लिसराइडेमिया होना तय होता है।

मानसिक सेहत के लिए भी खतरनाक


अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की वजह से नींद संबंधी समस्याएं भी पैदा होती हैं, जिनकी वजह से एंक्जाइटी, डिप्रेसन और कई तरह के मेंटल डिसॉर्डर हो सकते हैं।

सांसों पर भी आता है संकट


शोधकर्ताओं को यूपीएफ की वजह से एलर्जी के साथ ही अस्थमा और लंग्स की क्षमता में कमी के भी पुख्ता प्रमाण मिले हैं।

पाचनतंत्र का हो जाता है कबाड़ा


शोधकर्ताओं का दावा है कि जो लोग लगातार यूपीएफ का सेवन करते हैं उनमें मोटापा, मेटाबोलिक सिंड्रोम, नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज जैसी बीमारियां कैंसर और सीवीडी के हमलों से 5 से 10 साल पहले दिखने लग जाती हैं। ऐसे लोग जिन्हें पाचनतंत्र संबंधी समस्याएं होने लग गई हैं, मोटापा बढ़ गया है वे मान लें कि यूपीएफ की मौत की गारंटी पूरी होने के बहुत करीब हैं। इसके अलावा क्रॉन डिजीज व अल्सरेटिव कोलाइटिस भी आम बीमारी है, जो यूपीएफ से जुड़ी है।

लंबा जीना है, तो इस तरह खाएं


विश्व स्वास्थ्य संगठन और ब्रिटिश राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के मुताबिक लोगों को आहार के रूप में हर दिन ताजे फल और सब्जियों का इस्तेमाल करना चाहिए। आहार में साबुत अनाज को जरूर शामिल करें। एक वयस्क को दिन में कम से कम 30 ग्राम फाइबर का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। इसके अलावा प्रोटीन के लिए दूध-दही, दाल व पनीर सहित अन्य स्रोतों का इस्तेमाल कर सकते हें। दिन में कम से कम 2.5-3 लीटर पानी पिएं। 6 ग्राम से ज्यादा नकम नहीं खाएं और 20 ग्रामी से ज्यादा सैचुरेटेड फैट (घी या बटर) का इस्तेमाल न करें। इसके अलावा चीनी 25-30 ग्राम से ज्यादा चीनी नहीं खाएं।

यहां पढ़ें पूरा अध्ययन

https://www.bmj.com/content/384/bmj-2023-077310

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