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क्या सच में होगा कल्कि अवतार! कितना समय है बाकी, कैसे होगा कलयुग का अंत 

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साक्षी चौधरी

हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि जब भी पृथ्वी पर बुराई का बोलबाला होता है। भगवान धर्म की स्थापना करने और बुराई को खत्म करने के लिए विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं] जिन्हें अवतार के रूप में जाना जाता है। इन अवतारों में से कल्कि अवतार के कलियुग के अंत में प्रकट होने की भविष्यवाणी की गई है।

सनातन आस्था में भगवान विष्णु के 24 अवतार का वर्णन किया गया हैं] अलग-अलग काल में भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों को दर्शा कर ये संदेश देने की कोशिश की गई है] कि जब-जब धरती पर पाप और अधर्म बढ़ेगा] तब-तब भगवान विष्णु अवतार लेकर पापियों का नाश कर संपूर्ण धरती का उद्धार करेंगे।

आज हम आपको भगवान विष्णु के उन्हीं अवतारों में से एक अवतार के बारे में बताएँगे जिसे धारण कर भगवान विष्णु कलयुग का अंत कर पुनः सतयुग की स्थापना करेंगे। ऐसा माना जाता है कि कलयुग के अंत और सतयुग के प्रारंभ से पहले भगवान विष्णु के 10वें अवतार का आगमन होगा] जिसके द्वारा संपूर्ण मानव जाती का उद्धार होगा और धर्म की पुनः स्थापना की जाएगी।

कब हुई थी कलयुग की शुरूआत?

सनातन वेद पुराण के अनुसार कलयूग की शूरूआत 3102 ईसा पूर्व हो गई थी और इसकी पूरी उम्र करीब 4,32000 वर्ष बताई गई है, जिसमे से साल 2023 तक 5125 वर्ष बीत चुके है। माना जाता है कि भगवान विष्णु के 10वें अवतार का अवतरण सावन मास में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में स्थित संभल गाँव में होगा।

कैसा होगा भगवान विष्णु के कल्कि अवतार का स्वरूप?

सनातन धर्म-ग्रंथों में से एक ग्रंथ अग्नि पुराण के सौलहवें अध्याय में कल्कि अवतार को तीर-कमान धारण किए हुए एक घुड़सवार के रूप में दिखाया गया हैं। साथ ही साथ उसमें ये भी दर्शाया गया है कि कल्कि भगवान देवदत्त नाम के एक सफेद घोड़े पर बैठ कर आएंगे और पापियों का विनाश करेंगे। यह अवतार 64 कलाओं से युक्त होगा। इनके गुरु चिरंजीवी भगवान परशुराम होंगे जिनके निर्देश पर कल्कि भगवान शिव की तपस्या करेंगे और दिव्यशक्तियों को प्राप्त कर अधर्म का अंत करेंगे। और इसी के साथ पृथ्वी पर धर्म की पुनः स्थापना की जाएगी और सतयुग का आरंभ होगा।

क्या कल्कि अवतार से ही होगी सतयुग की शुरुआत ?

कल्कि अवतार की भविष्यवाणी कलियुग के कठिन समय के बीच मानवता के लिए आशा की किरण की तरह है। यह हमें अस्तित्व के सतत परिवर्तन की याद दिलाता है। धरा पर धार्मिकता को बनाए रखने और मानवता को आध्यात्मिक दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए दिव्य अवतार प्रकट होते रहते हैं। जैसा कि हम कल्कि अवतार के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कल्कि अवतार की भविष्यवाणी कलियुग के कठिन समय के बीच मानवता के लिए आशा की किरण के रूप में कार्य करती है। जैसा कि हम कल्कि अवतार के साथ-साथ सतयुग के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं] आइए हम अपने अदंर सद्गुणों का विकास करें और धर्म के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करें] जिससे ब्रह्मांडीय संतुलन की प्रक्रिया में अपना योगदान दे सकें।

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सनातन धर्म-ग्रंथों में से एक ग्रंथ अग्नि पुराण के सौलहवें अध्याय में कल्कि अवतार को तीर-कमान धारण किए हुए एक घुड़सवार के रूप में दिखाया गया हैं। साथ ही साथ उसमें ये भी दर्शाया गया है कि कल्कि भगवान देवदत्त नाम के एक सफेद घोड़े पर बैठ कर आएंगे और पापियों का विनाश करेंगे। यह अवतार 64 कलाओं से युक्त होगा। इनके गुरु चिरंजीवी भगवान परशुराम होंगे जिनके निर्देश पर कल्कि भगवान शिव की तपस्या करेंगे और दिव्यशक्तियों को प्राप्त कर अधर्म का अंत करेंगे। और इसी के साथ पृथ्वी पर धर्म की पुनः स्थापना की जाएगी और सतयुग का आरंभ होगा।

क्या कल्कि अवतार से ही होगी सतयुग की शुरुआत ?

कल्कि अवतार की भविष्यवाणी कलियुग के कठिन समय के बीच मानवता के लिए आशा की किरण की तरह है। यह हमें अस्तित्व के सतत परिवर्तन की याद दिलाता है। धरा पर धार्मिकता को बनाए रखने और मानवता को आध्यात्मिक दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए दिव्य अवतार प्रकट होते रहते हैं। जैसा कि हम कल्कि अवतार के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कल्कि अवतार की भविष्यवाणी कलियुग के कठिन समय के बीच मानवता के लिए आशा की किरण के रूप में कार्य करती है। जैसा कि हम कल्कि अवतार के साथ-साथ सतयुग के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं] आइए हम अपने अदंर सद्गुणों का विकास करें और धर्म के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करें] जिससे ब्रह्मांडीय संतुलन की प्रक्रिया में अपना योगदान दे सकें।

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सनातन धर्म-ग्रंथों में से एक ग्रंथ अग्नि पुराण के सौलहवें अध्याय में कल्कि अवतार को तीर-कमान धारण किए हुए एक घुड़सवार के रूप में दिखाया गया हैं। साथ ही साथ उसमें ये भी दर्शाया गया है कि कल्कि भगवान देवदत्त नाम के एक सफेद घोड़े पर बैठ कर आएंगे और पापियों का विनाश करेंगे। यह अवतार 64 कलाओं से युक्त होगा। इनके गुरु चिरंजीवी भगवान परशुराम होंगे जिनके निर्देश पर कल्कि भगवान शिव की तपस्या करेंगे और दिव्यशक्तियों को प्राप्त कर अधर्म का अंत करेंगे। और इसी के साथ पृथ्वी पर धर्म की पुनः स्थापना की जाएगी और सतयुग का आरंभ होगा।

क्या कल्कि अवतार से ही होगी सतयुग की शुरुआत ?

कल्कि अवतार की भविष्यवाणी कलियुग के कठिन समय के बीच मानवता के लिए आशा की किरण की तरह है। यह हमें अस्तित्व के सतत परिवर्तन की याद दिलाता है। धरा पर धार्मिकता को बनाए रखने और मानवता को आध्यात्मिक दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए दिव्य अवतार प्रकट होते रहते हैं। जैसा कि हम कल्कि अवतार के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कल्कि अवतार की भविष्यवाणी कलियुग के कठिन समय के बीच मानवता के लिए आशा की किरण के रूप में कार्य करती है। जैसा कि हम कल्कि अवतार के साथ-साथ सतयुग के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं] आइए हम अपने अदंर सद्गुणों का विकास करें और धर्म के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करें] जिससे ब्रह्मांडीय संतुलन की प्रक्रिया में अपना योगदान दे सकें।

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