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China’s Sinking Cities : चीन के 80 से ज्यादा शहरों में धंस रही जमीन, सदी के अंत 1 तक मीटर धंस जाएंगे 20 शहर

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China’s Sinking Cities यानी जमीन में धंसते चीन के शहरों की चर्चा दुनियाभर में हो रही है। सैटेलाइट इमेज डेटा के एनालिसिस के आधार पर किए गए एक अध्ययन के मुताबिक चीन के 80 से ज्यादा शहर जमीन में धंस रहे हैं। इनमें से करीब 20 शहर ऐसे हैं, जो हर साल 10 मिलीमीटर तक धंस रहे हैं। यानी ये शहर इस सदी के अंत तक करीब 1 मीटर तक धंस जाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का तीव्र विकास अब इसके अस्तित्व के लिए तरह-तरह के संकट खड़े कर रहा है। वामपंथी पार्टी की तानाशाही में चीन ने वह सब हासिल किया, जो भारत को हासिल करने में अभी करीब 30-40 वर्ष लग जाएं। लेकिन, नियम-कायदे, कानू​न और प्राकृतिक संतुलन को ताक पर रखकर किए गए इस विकास के नतीजे आने शुरू हो गए हैं।
असल में चीन में इस भू-धंसाव (subsidence) का सबसे बड़ा कारण चीन के इन शहरों में अंधाधुंध तरीके से बनाई गई बहुमंजिला इमारतें हैं। शोध पत्रिका साइंस के हालिया अंक में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक चीन में व्यापक शहरीकरण की वजह से भू-धंसाव का खतरा पैदा हुआ है। स्पेसबोर्न सिंथेटिक एपर्चर रडार इंटरफेरोमेट्री तकनीक के जरिये 2015 से 2022 तक चीन के सभी प्रमुख शहरों में भूमि धंसाव का एक व्यवस्थित अध्ययन किया गया। इसमें सामने आया कि शहरी भूमि में से 45 फीसदी प्रतिवर्ष 3 मिलीमीटर की गति से और 16 फीसदी प्रतिवर्ष 10 मिलीमीटर से ज्यादा तेजी से जमीन में धंस रही है। इसकी वजह से चीन करीब 36 फीसदी आबादी खतरे में है। अगर मौजूदा दर से ये शहर जमीन में धंसते रहे, तो साल 2120 तक चीन के की 26 फीसदी तटीय जमीन समुद्र तल से नीचे होगी, जिससे करीब 11 फीसदी आबादी पर विस्थापित होने का खतरा होगा।

शंघाई पर मंडरा रहा जलमग्न होने का खतरा


ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय में जलवायु अनुकूलन के प्रोफेसर रोबर्ट निकोलस के मुताबिक चीनी शहरों के जमीन में धंसने के कई कारण हैं। इन कारणों पर अलग से शोध की जरूरत है। हालांकि, सबसे बड़े कारणों में भूजल का अत्यधिक दोहन और अंधाधुंध तरीके से बहुमंजिला इमारतों का निर्माण प्रमुख है। क्योंकि, ठीक इस तरह की समस्या का सामना न्यूयॉर्क जैसे शहर भी कर रहे हैं। हालांकि, चीन के सबसे बड़े शहर शंघाई पर जलमग्न होने का प्रचंड खतरा मंडरा रहा है। क्योंकि, पिछले 100 वर्ष में ही यह शहर करीब 3 मीटर तक जमीन में धंस चुका है। इस लिहाज से देखें, तो शंघाई पिछली सदी में हर साल करीब 30 मिलीमीटर तक धंसा है और इस सदी के अंत तक यह करीब 3 मीटर और धंस जाएगा।

भूजल दोहन बड़ा कारण

प्रो. रोबर्ट निकोलस के मुताबिक भूजल दोहन भू-धंसाव के सबसे बड़े कारणो में से एक होता है। चीन में बहुत सारे लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं, जो हाल ही में भूगर्भिक रूप से अवसादग्रस्त हुए हैं। इसलिए जब भूजल निकालते हैं या मिट्टी को सूखाते हैं, तो धंसाव होना स्वाभाविक है। चीन को अगर इन शहरों में जमीन को धंसने से रोकना है, तो भूजल संरक्षण के उपायों पर जोर देना होगा।

….तो प्यासा मरेगा चीन


चीन की 95 फीसदी आबादी इसके पूर्वी हिस्से में समुद्री क्षेत्र के आसपास रहती है। चीन की दुनिया की आबादी में हिस्सेदारी करीब 17 फीसदी है, चीन के पास दुनिया की करीब 6 फीसदी जमीन कब्जे में है और दुनिया के करीब 6 फीसदी जल संसाधन भी चीन के पास हैं। लेकिन, चीन प्रतिव्यक्ति जल संसाधान में हिस्सेदारी के लिहाज से चीन का स्थान नीचे दूसरा है। चीन को बहुत उम्मीद थी कि ब्रह्मपुत्र नदी के बहाव को मोड़कर अपनी प्यास बुझा लेगा, लेकिन ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम भले ही चीन कब्जे वाले क्षेत्रों से होता है, लेकिन नदी में पानी की बड़ी मात्रा अरुणाचल प्रदेश से आती है। यही वजह है कि चीन बार-बार अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा जता रहा है। अगर चीन में भूजल संरक्षण के गंभीर प्रयास नहीं हुए, तो कुछ दशकों में ही चीन की करीब 30 फीसदी आबादी के सामने प्यास से मरने की नौबत आ जाएगी।

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