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बिना सैलरी काम करेंगे इस गरीब देश के राष्ट्रपति-गृह मंत्री!

Asif_Ali_Zardari

Economic crisis | पाकिस्तान अपने इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट में फंस गया है. देश दिवालियापन की कगार पर है. पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय संगठनों से लेकर कई देशों से आर्थिक मदद की गुहार लगा रहा है. देश में हाल ही में नई सरकार आई है. मंगलवार को देश के नए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और देश के गृह मंत्री ने बिना वेतन के काम करने का फैसला किया. इस फैसले की जहां सराहना हो रही है, वहीं राजनीतिक विश्लेषक और विरोधी दावा कर रहे हैं कि यह फैसला अदूरदर्शिता से लिया गया है.

देश की आर्थिक स्थिति नाजुक

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के नए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने मंगलवार को वेतन नहीं लेने के अपने फैसले की घोषणा की। देश पिछले कुछ सालों से आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश की आर्थिक स्थिति नाजुक है. इसलिए उन्होंने घोषणा की कि राष्ट्रपति के वेतन न लेने से देश के खजाने पर बोझ नहीं पड़ेगा.

देश के सबसे अमीर नेताओं में शामिल

आसिफ अली जरदारी के इस फैसले की जानकारी राष्ट्रपति सचिवालय ने भी दे दी है. जरदारी देश के सबसे अमीर नेताओं में से एक हैं। उनकी कुल संपत्ति 1.8 बिलियन डॉलर बताई गई है। राष्ट्रपति पद की शपथ लेते ही जरदारी ने अपनी बेटी आसिफा को पाकिस्तान की प्रथम महिला घोषित किया। इतिहास में पहली बार किसी राष्ट्रपति ने किसी बेटी को प्रथम महिला का दर्जा दिया है।

गृह मंत्री भी पीछे नहीं

पाकिस्तान की संसद राष्ट्रपति का वेतन तय करती है. इस हिसाब से राष्ट्रपति का वेतन 8,46,550 पाकिस्तानी रुपये प्रति माह है। उन्हें अन्य अनुषंगी लाभ भी दिये जाते हैं। जरदारी के वेतन न लेने के ऐलान के बाद अब गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी वेतन न लेने का फैसला सुनाया है. मौजूदा समय पाकिस्तान के लिए चुनौतीपूर्ण है. उन्होंने बताया कि देश की सेवा करने का बहुत अच्छा अवसर है। उनके फैसले की सराहना की जाती है.

क्या है असल कारण


हालांकि पाकिस्तानी नेताओं के सैलरी न लेने के निर्णयों को ढोंग अधिक बताया जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक पाकिस्तान मूल समस्याओं पर काम नहीं करेगा वह आर्थिक संकट से बाहर नहीं निकल सकता है। भारत के बिना उसका अस्तित्व खतरे में ही रहेगा। आतंकवाद और इस्लामिक आतंकवाद की डॉक्टरीन से उसे बाहर निकलना होगा। आधुनिक शिक्षा पर जोर देना होगा। कटटर मुल्ला मौलवियों के प्रभाव से देश को बाहर निकालना होगा। जिहाद की भावना से निकलकर हकीकत को स्वीकार करना है। आर्थिक संकट का मूल कारण इस्लामिक रूढ़िवादिता भी है।

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