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Fairness Cream: किडनी के लिए भी घातक, शोध में हुआ खुलासा, आइए जानें विस्तार से

By samacharpatti.com Apr 26, 2024
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Krishna Trivedi [Fairness Cream]: Kidney international के नवीनतम अंक में प्रकाशित लेख में एस्टर एमआईएमएस अस्पताल, कोट्टक्कल, जिला मलप्पुरम के डॉक्टरों ने मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी के 15 मामलों पर प्रकाश डाला गया है। इन मामलों में फेयरनेस क्रीम के नियमित उपयोग को एक सामान्य कारक के रूप में पहचाना गया। रक्त और मूत्र के नमूनों की हेवी मेटल स्क्रीनिंग के माध्यम से आगे की जांच में पारे के ऊंचे स्तर का पता चला, जो एक खतरनाक जहरीला पदार्थ है। चौकाने वाली बात यह है कि फेयरनेस क्रीमों की जांच से पता चला है कि कुछ मामलों में पारे का स्तर निधारित सीमा से 10,000 गुना तक अधिक है।

Fairness Cream: मरीजों में पाए गए ये लक्षण

साल 2021 से कोझिकोड के किडनी विशेषज्ञ डॉ. रंजीत नारायणन मरीजों पर शोध कर रहे हैं, उन्होंने membranous nephropathy से पीड़ित रोगियों में शारीरिक थकान, हल्की सूजन और झागदार पेशाब का आना आदि लक्षण पाए गए। साथ ही, रोगियों में उनके मूत्र में प्रोटीन का उच्च स्तर पाया गया, जो प्रति दिन 6.5 होना चाहिए जबकि रोगियों में 22.2 ग्राम तक था। membranous nephropathy (MN) एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो नेफ्रोटिक सिंड्रोम नामक स्थिति की ओर ले जाती है, जहां मूत्र में बहुत अधिक प्रोटीन निकलता है, जो अंततः किडनी की विफलता का कारण बनता है। आम तौर पर, लगभग 70 फीसदी से 80 फीसदी मामले phospholipase A-2 receptor (PLA2R) नामक एक विशिष्ट प्रोटीन स जुड़े होते हैं।

हालाँकि, 2023 की शुरुआत में डॉ. नारायणन ने कुछ मरीजों में असामान्य लक्ष्ण देखे। समान लक्षणों वाले झिल्लीदार नेफ्रोपैथी के कई मामले उनके क्लीनिक में सामने आए, जोकि मरीजों में नकारात्मक रूप से पाये गये। आगे की जांच से पता चला कि इन रोगियों में न्यूरल एपिडर्मल ग्रोथ फैक्टर-लाइक प्रोटीन 1 (एनईएल-1) नामक एक अन्य प्रोटीन के लिए जांच की गई, जांच में  दुर्बल बिमारी पायी गई।

चेन्नई की एक प्रयोगशाला में किया गया परीक्षण

चेन्नई की एक प्रयोगशाला में पाया गया कि इन सभी रोगियों में बीमारी का स्तर बढ़ा हुआ था। डॉ. नारायणन ने पाया कि तमिलनाडु में, एनईएल-1 से जुड़ी इस प्रकार की झिल्लीदार नेफ्रोपैथी अक्सर उच्च स्तर के पारा युक्त पारंपरिक दवाओं के कारण होती है। हालाँकि, उनके किसी भी मरीज ने इन दवाओं का उपयोग करने की बात स्वीकार नहीं की। इसके चलते डॉ. नारायणन को सौंदर्य प्रसाधनों जैसे पारे के संपर्क के अन्य संभावित स्रोतों की जांच करनी पड़ी। यह विश्व स्तर पर सर्वविदित है कि पारा युक्त फेस क्रीम नेफ्रोटिक सिंड्रोम का कारण बन सकती है।

Fairess Cream: से किडनी की क्षति

शोध में fairness Cream के संभावित ख़तरों पर प्रकाश डाला है, जिससे गुर्दे की क्षति का एक चिंताजनक संबंध सामने आया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन रोगियों ने नियमित रूप से इन क्रीमों का उपयोग किया, उन्हें नेफ्रोटिक सिंड्रोम, एक किडनी विकार, विकसित होने से पहले सूक्ष्म लक्षणों का अनुभव हुआ।

एक समर्पित शोध दल द्वारा किए गए अध्ययन में एनईएल-1 नामक प्रोटीन से जुड़े नेफ्रोटिक सिंड्रोम के 15 मामलों की जांच की गई। इन मामलों में से 13 रोगियों ने फेयरनेस क्रीम का उपयोग करने के बारे में, जिनमें से अधिकांश अनियमित ब्रांड थे, जो त्वरित परिणाम का वादा करते थे।

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