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Green Sky in Dubai : दुबई में हरा आसमान…! खौफ में लोग, क्या है सच्चाई

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Green Sky in Dubai नाम से सोशल मीडिया पर कई वीडियो और फोटो दिख रहे हैं। आपने आसमान को लाल, नीला, पीला, काला, सुनहरा और केसरिया तो देखा होगा, लेकिन शायद हरा कभी नहीं देखा होगा। जाहिर है, जब कभी आपने आसमान को हरा देखा ही नहीं, तो ऐसे वीडियो देखकर आपको यही लग रहा होगा कि यह सब कैमरे की कलाकारी है। इन फोटो और वीडियो में कैमरे की कलाकारी है, या वाकई दुबई में आसमान हरा हुआ हम इस बात की पुष्टि तो नहीं कर सकते हैं। लेकिन, क्या कभी आसमान हरा हो सकता है? इस सवाल का जवाब जरूर देंगे।

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एक्स पर लोगों की प्रतिक्रिया
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किसी फिक्शन फ़िल्म की तरह अचानक बदल गया आसमान का रंग।

क्या हरा हो सकता है आसमान

जी हां, तमाम रंगों की तरह ही आसमान हरे रंग का भी दिखाई दे सकता है। हालांकि, विरले ही इस तरह की परिस्थितियां बनती हैं, जब आसमान हरा हो जाए। भारत में हरे आसमान जैसी स्थिति कभी बनी हो हमारे संज्ञान में नहीं है। अगर आपको इसकी जानकारी हो, तो कृपया कमेंट बॉक्स में हमें जरूर बताएं।

कहां हरा होता है आसमान

अक्सर, आसमान अमेरिका में हरा होता है। यहां के लोगों की धारणा है कि जब थंडरस्टोर्म (झंझावत) व टोरनेडो (बवंडर) आते हैं, तो उससे पहले आसमान हरा हो जाता है। हालांकि, यह सिर्फ एक धारणा है। अमेरिका के अलावा कभी-कभी खाड़ी देशों में भी आसमान हरा होता है। सोशल मीडिया पर तैर रहे वीडियो और फोटो में किए गए दावों के मुताबिक 16 और 17 अप्रैल को तेजी बारिश के साथ आसमान अचानक हरा हो गया था।

हरे आसमान का वैज्ञानिक सच क्या है

संक्षिप्त में बताएं, तो जब सूर्यास्त से आने वाली लाल रोशनी थंडरस्टोर्म के भीतर नीले या अपारदर्शी सफेद दिखने वाले पानी और बर्फ की बूंदों से होकर गुजरती हैं, आसमान में हरे रंग की चमक आ जाती है।
अगर आपको इसके बारे में गहराई से जानना है, तो 1993 में प्रकाशित पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्ययन को पढ़ना होगा। इस अध्ययन में बताया गया है कि आसमान को हरा करने के लिए पहली जरूरत बड़ी मात्रा में वर्षा के साथ थंडरस्टोर्म और सूरज के साथ एक खास कोण पर जल कणों के संरेखण की जरूरत है। इस अध्ययन में डॉ. क्रेग बोहरेन और डॉ. एलिस्टेयर फ्रेजर ने हरे आसमान को लेकर दो सिद्धांत प्रस्तुत किए हैं।

बोहरेन का सिद्धांत
बोहरेन के मुताबिक थंडरस्टोर्म के पीछे सूरज की रोशनी क्षीण हो जाती है। नीचे से हमारे देखने पर पारदर्शी जलकण आसमान के रंग में नीले दिखते हैं, जब इन नीले कणों पर सूर्योदय या सूर्यास्त के आसपास लाल किरणें पड़ती हैं, तो हमें नीचे से ये हरी दिखाई देती हैं।

फ्रेजर का सिद्धांत
वहीं, डॉ. फ्रेजर के मुताबिक इस घटनाक्रम में थंडरस्टोर्म से ज्यादा सूरज की रोशनी ही अहम है। क्योंकि, साफ हवा में बिखरने वाली धूप जब जल कणों पर पड़ती है, तो नीला आकाश दिखता है, वहीं, जब क्षितिज से सूर्य की रोशनी लाल, नारंगी व पीली आती है और इन जलकणों से टकराती है, तो आकाश हरा दिखने लगता है।

जल कणों का आकार अहम

1996 में इस संबंध में ओक्लाहोमा विश्वविद्यालय के डॉ. फ्रैंक गैलाघेर ने रंगीन फोटोस्पेक्ट्रोमीटर से डाटा का विश्लेषण किया और पाया कि बारिश और बर्फ कणों द्वारा डूबते या उगते सूरज से सूर्य के प्रकाश का अवशोषण हरे रंग का कारण बन सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया में जल कणों का आकार सबसे अहम होता है। गैलाघेर के मुताबिक जल कणों का आकार हरे रंग की सटीक छाया निर्धारित करता है। छोटी-बड़ी बूंदें नीले-हरे या पीले-हरे आकाश की चितेरी हैं।  

डरने की कोई बात नहीं

पश्चिम सहित दुनिया के कई देशों में हरे आसमान को शापित मानते हैं। लोग इसे देखकर डरने लगते हैं। असल में इसमें अपशकुन जैसा कुछ नहीं है। यह एक साधारण मौसमी घटना है। हालांकि, यह घटना थंडरस्टोर्म के दौरान होती है, जिसकी वजह से लोगों का डरना स्वाभाविक है।
क्या आप इस तरह की जानकारी से भरे ज्यादा आर्टिकल पढ़ना चाहते हैं? अगर हां, तो कृपया हमारे कमेंट सेक्शन में ‘हां’ लिखें और आपको यह जानकारी कैसी लगी, यह भी बताएं। 

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