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कर्नाटक : 28 में 18 सीटों पर कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस नेताओं के परिवार ही उम्मीदवार

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कर्नाटक : 28 में 18 सीटों पर कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस नेताओं के परिवार ही उम्मीदवार

  • अकेले चुनाव लड़ रही कांग्रेस ने रिकॉर्ड 14 उम्मीदवार ऐसे उतारे जो नेताओं के सगे-संबंधी
    बेंगलुरू। कर्नाटक में लोकसभा की 28 सीटों पर मुकाबला कांग्रेस और भाजपा-जेडीएस के गठबंधन में हो रहा है। तीनों दलों ने मिलकर कुल 28 में से 18 सीटों पर 23 ऐसे उम्मीदवारों को उतारा है, जो पार्टी नेताओं के परिवार के सदस्य या सगे संबंधी हैं। परिवार ही उम्मीदवार के चलन में 14 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे आगे है। वहीं, भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने ऐसे 9 चेहरों को मैदान
    में उतरा है, जिनकी पहचान उनका सियासी खानदान है। भाजपा-जेडीएस गठबंधन में जेडीएस 3 और भाजपा 25 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। जेडीएस प्रमुख एचडी कुमारस्वामी सहित उनके परिवार व रिश्तेदारों में से तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। वहीं, भाजपा के 5 ऐसे उम्मीदवार हैं, जिनका संबंध पार्टी के पुराने नेताओं से है।
    इस तरह कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों पर परिवारवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीखे हमलों के बीच कर्नाटक में भाजपा भी परिवार ही उम्मीदवार के चलन में पूरी तरह शामिल है। मोटे तौर पर कर्नाटक में तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने सामूहिक रूप से वंशवादी परंपरा को स्वीकारते हुए बड़े नेताओं के बेटे, बेटियां, पत्नियां, बहनें, भाई और अन्य
    रिश्तेदारों को उम्मीदवार बनाया है। कुल संख्या के साथ ही बेटे-बेटियों को टिकट देने की दौड़ में भी कांग्रेस अव्वल है। कांग्रेस ने 10 ऐसे उम्मीदवार बनाए हैं, जो बड़े कांग्रेसी नेता के बेटे-बेटी हैं।
    भाजपा ने इस श्रेणी में 4 उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं, जबकि जेडीएस के दो उम्मीदवार इस दायरे में आते हैं। तीनों पार्टियों ने मिलकर बेटे-बेटियों के अलावा 7 ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं, जो इन पार्टी नेताओं के करीबी रिश्तेदार हैं। इनमें कांग्रेस के चार, भाजपा के दो व एक जेडीएस से हैं।
    कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। इस सरकार के 6 मौजूदा मंत्रियों व एक पूर्व मंत्री के बेटे-बेटियों को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है। फैसले का बचाव करते हुए राज्य के उपमुख्यमंत्री व कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार कहते हैं कि उनकी पार्टी ने युवा, शिक्षित और महिला उम्मीदवारों को आगे बढ़ाया है। शिवकुमार के छोटे भाई डीके सुरेश बेंगलुरु ग्रामीण
    से कांग्रेस के उम्मीदवार है। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया वंशवाद के आरोपों पर कहते हैं कि भाजपा के आरोपों से फर्क नहीं पड़ता, इस मामले में जनता की राय अहम है।
    वहीं, भाजपा की तरफ से परिवारवाद की आलोचना के बीच कुछ परिवारों के सदस्यों को टिकट दिए जाने की अलोचना करते हुए पूर्व मंत्री व भाजपा नेता केएस ईश्वरप्पा कहते हैं कि येदियुरप्पा और उनके बेटे व भाई बीवाई विजयेंद्र (पार्टी अध्यक्ष) के प्रभाव में भाजपा पारिवारिक राजनीति के आकर्षण के आगे झुक गई है। हालांकि, ईश्वरप्पा की आलोचना विरोधाभासी है, क्योंकि
    उनका असंतोष उनके बेटे केई कंथेश को हावेरी लोकसभा टिकट से इन्कार के बाद उपजा है।

कांग्रेस नेताओं के बेटे-बेटी व रिश्तेदार


मंसूर अली खान, राज्यसभा के पू्र्व उपसभापति रहमान खान के बेटे हैं। बेंगलुरू मध्य से उम्मीदवार हैं।
सुनील बोस, राज्य के समाज कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा के बेटे हैं। चामराजनगर से उम्मीदवार हैं।
राजीव गोडा, कर्नाटक विधानसभा के पू्र्व अध्यक्ष एमवी वेंकटप्पा के बेटे हैं। बेंगलुरू उत्तर से उम्मीदवार हैं।
मृणाल हेबालकर, महिला व बाल विकास मंत्री लक्ष्मी हेबालकर के बेटे हैं। बेलगावी से उम्मीदवार हैं।
सौम्या रेड्डी, परिवहन मंत्री रामालिंगा रेड्डी की बेटी हैं। बेंगलुरु दक्षिण से उम्मीदवार हैं।
गीता शिव राजकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सरेकोप्पा बंगरप्पा की बेटी हैं। शिवमोगा से उम्मीदवार हैं।
प्रियंका, पीडब्लयूडी मंत्री सतीश जारकीहोली की बेटी हैं। चिक्कोडी से उम्मीदवार हैं।
सागर खांद्रे, वन मंत्री ईश्वर खांद्रे के बेटे हैं। बीदर से उम्मीदवार हैं।
संयुक्ता, टेक्सटाइल मंत्री शिवानंद पाटिल की बेटी हैं। बागलकोट से उम्मीदवार हैं।
केवी गोथम, बेंगलुरू के पूर्व मेयर केवी विजय कुमार के बेटे हैं। कोलार से उम्मीदवार हैं।
राधाकृष्ण डोड्डामणि, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दामाद हैं। गुलबर्गा से उम्मीदवार हैं।
डीके सुरेश, उपमुख्यमंत्री व राज्य कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के भाई हैं। बेंगलुरू ग्रामीण से उम्मीदवार हैं।
प्रभा मल्लिकार्जुन, हॉर्टिकल्चर मंत्री एसएस मल्लिकार्जुन की पत्नी हैं। दावनगेरे से उम्मीदवार हैं।
राजशेखर हिंतल, कोप्पल विधायक राघवेंद्र हिंतल के भाई हैं। कोप्पल से उम्मीदवार हैं।

भाजपा नेताओं के बेटे-बेटी व रिश्तेदार


बसवराज बोम्मई, पूर्व सीएम एसआर बोम्मई के बेटे हैं। खुद भी सीएम रहे हैं। हावेरी से उम्मीदवार हैं।
यदुवीर केसी वाडियार, मैसूर के पूर्व राजा व सांसद श्रीकांतदत्त वाडियार के दत्तक पुत्र हैं। चामराजनगर से उम्मीदवार हैं।
गायत्री सिद्धेश्वर, पू्र्व केंद्रीय मंत्री जीएम सिद्धेश्वर की पत्नी हैं। दावनगेरे से उम्मीदवार हैं।
तेजस्वी सूर्या, बसवनादगुडी के विधायक रवी सुब्रमण्यम के रिश्तेदार। बेंगलुरू दक्षिण से उम्मीदवार हैं।

जेडीएस नेताओं के बेटे-बेटी व रिश्तेदार


एचडी कुमारस्वामी, खुद जेडीएस के अध्यक्ष हैं, पूर्व पीएम एचडी देवेगौडा के बेटे हैं। मांड्या से उम्मीदवार हैं
प्रज्वल रेवन्ना, पूर्व मंत्री एचडी रेवन्ना के बेटे व पीएम देवेगौडा के पोते हैं। हासन से उम्मीदवार हैं।
सीएन मंजूनाथ, पूर्व पीएम देवेगौडा के दामाद हैं। भाजपा के टिकट पर बेंगलुरु ग्रामीण से उम्मीदवार हैं।

जनमत में गहराई तक हैं परिवारवाद की जड़ें


कर्नाटक सहित देश के तमाम हिस्सों में परिवारवादी राजनीति की जड़ें जनमत में गहराई तक जाती हैं। भारतीय राजनीति से परिवारवाद को उखाड़ने के ज्यादातर प्रयास निरर्थक साबित हुए हैं, क्योंकि यह पारिवारिक राजनीतिक उपक्रम कई पीढ़ियों से भारतीय राजनीतिक के ताने-बाने में बुना हुआ है। यह मुद्दा राजनीतिक पैंतरेबाजी से परे है। क्योंकि, ऐसे परिवारों ने
खुद जनता के बीच अलग-अलग तरीकों से गहराई से जोड़ रखा है। खासतौर पर ऐसे परिवार शैक्षिक संस्थानों, स्वास्थ्य सुविधाओं और सहकारी समितियों के जरिये जनता से जुड़ते हैं और सीधे तौर पर जनमत को प्रभावित करने की क्षमता हासिल कर लेते हैं। जब मतदाता इनके ऐसे प्रतिष्ठानें के जरिये इन नेताओं के संपर्क में आते हैं, तो यह संबंध समर्थन में बदल जाता है।

चुनावी राजनीति में देवेगौडा परिवार के नौ सदस्य


जेडीएस को कर्नाटक में कई बार अप्पा-मक्कला (बाप-बेटा) पार्टी कहा जाता है। पूर्व पीएम एचडी देवेगौडा सहित उनके परिवार से अबतक कुल 9 सदस्य चुनावी राजनीति में उतर चुके हैं। फिलहाल, इस परिवार से पार्टी अध्यक्ष व देवेगौडा के बेटे एचडी कुमारस्वामी मांड्या से चुनावी मैदान में हैं। देवेगौडा के दामाद सीएम मंजुनाथ भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि,उनके पोते प्रज्वल रेवन्ना पार्टी के टिकट पर हासन सीट से मैदान में हैं, जो यहां के मौजूदा सांसद भी हैं। वहीं, गौडा खुद कर्नाटक से राज्यसभा सदस्य हैं। कुमारस्वामी फिलहाल चन्नापटना से विधायक हैं। कुमारस्वामी की पत्नी अनीता रामनगर से विधायक रह चुकी हैं। कुमारस्वामी का बेटा निखिल 2019 में मांड्या से लोकसभा चुनाव लड़ चुका है। गौडा के बड़े बेटे एचडी
रेवन्ना होलेनारसिपुरा से विधायक व मंत्री रह चुके हैं। उनकी पत्नी भवानी रेवन्ना हासन जिला पंचायत की सदस्य रही हैं। उनका बेटा सूरज एमएलसी है। इस तरह से गौडा परिवार के सदस्य देश की लोकसभा, राज्यसभा व राज्य की विधानसभा व विधानपरिषद में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

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