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One Nation One Election : कब से, कोविंद समिति ने राष्ट्रपति को सौंपी रिपोर्ट

One Nation One Election

One Nation One Election: पर गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी है. इस समिति का नेतृत्व देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कर रहे हैं. One Nation One Election (एक राष्ट्र, एक चुनाव) थीम के लिए देश के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द के नेतृत्व में एक समिति नियुक्त की गई थी। इनमें गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हैं. समिति ने अपनी 18 हजार छः  सौ 26 पेज की रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी है। 191 दिनों दिनों में तैयार इस  18,626 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि 47 राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी समितियों के साथ अपने विचार साझा किए, जिनमें से 32 राजनीतिक दल ‘One Nation One Election’ के पक्ष में थे।

रामनाथ कोविंद की समिति ने एक अहम सिफारिश की है कि पहले चरण में देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं और दूसरे चरण में इन दोनों चुनावों के साथ-साथ नगर निगम और पंचायत चुनाव भी कराए जाएं. इसके साथ ही सम्मति ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं. मतदाता सूची एवं पहचान पत्र लोकसभा, विधानसभा, नगर पालिकाओं और पंचायतों के चुनावों के लिए एक समान मतदाता सूची और पहचान पत्र की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके लिए अनुच्छेद 325 में संशोधन किया जाना चाहिए, मतदाता सूची एवं पहचान पत्र लोकसभा, विधानसभा, नगर पालिकाओं और पंचायतों के चुनावों के लिए एक समान मतदाता सूची और पहचान पत्र की व्यवस्था की जानी चाहिए। उसके लिए अनुच्छेद 325 में संशोधन किया जाना चाहिए।

देश में एक कानूनी तंत्र विकसित किया जाए

भारत की स्वतंत्रता के पहले दो दशकों के बाद एक साथ कोई चुनाव नहीं हुए। इसका देश की अर्थव्यवस्था, राजनीति और समाज पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा। प्रारंभ मे  हर दस साल में दो चुनाव होते थे। अब हर साल कई चुनाव होते हैं. इससे सरकार, उद्योगों, श्रमिकों, अदालतों, राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और नागरिकों पर भारी बोझ पड़ रहा है। इसलिए  समिति ने यह भी सिफारिश की है कि सरकार को एक साथ चुनावों के चक्र को उलटने के लिए एक कानूनी तंत्र विकसित करना चाहिए।

यहि त्रिशंकु बहुमत मिलने और  सरकार गिरने पर क्या होगा प्रावधान ?

त्रिशंकु सदन या अविश्वास प्रस्ताव की स्थिति में नए सदन के गठन के लिए दुबारा से चुनाव कराए जा सकते हैं, ऐसी स्थिति में नए लोकसभा (विधानसभा) का कार्यकालए पहले की लोकसभा (या विधानसभा) की बाकी बची अवधि के लिए ही होगा, इसके बाद सदन को भंग माना जाएगाण् इन चुनावों को Mid Term Election (मध्यावधि चुनाव) कहा जाएगा, वहीं पांच साल के कार्यकाल के ख़त्म होने के बाद होने वाले चुनावों को ‘आम चुनाव’ कहा जाएगा.

रामनाथ कोविंद की समिति ने अपनी रिपोर्ट में केशवानंद भारती बनाम केरल सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र शामिल किया है. समाज को बांध कर रखना संभव नहीं है. समाज बढ़ता है. उसकी जरूरतें बदल जाती हैं. उन जरूरतों को पूरा करने के लिए संविधान और कानूनों को बदलना होगा।

कोई भी एक पीढ़ी अगली पीढ़ी को बांध कर नहीं रख सकती. यही कारण है कि बुद्धिमानी से तैयार किए गए प्रत्येक संविधान का अपना संशोधन प्रावधान होता है. कमेटी ने पूरी स्थिति पर विचार किया और फिर हमने निष्कर्ष निकाला कि इन सिफारिशों से पारदर्शिता, समावेशिता और मतदाता विश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

देश और राज्यों में एक साथ चुनाव को भारी जनसमर्थन की उम्मीद है. इससे विकास प्रक्रिया और सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा मिलेगा। समिति ने कहा कि भारत की आकांक्षाएं भी पूरी होंगी. इससे विकास प्रक्रिया और सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा मिलेगा। समिति ने कहा कि भारत की आकांक्षाएं भी पूरी होंगी. केंद्र सरकार द्वारा गठित कमेटी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राज्यसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह और पूर्व लोकसभा महासचिव सुभाष कश्यप भी शामिल हैं.

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