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Rohtak To Singapore: कैप्टन हर्ष अहलावत की वैश्विक सफलता की कहानी, आइए जाने

Rohtak

Rohtak [Haryana]: भारत दुनिया में नई व्यवस्था के रूप में उभरा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऐतिहासिक निर्णयों और राजनीतिक रूप से विश्व मंच पर मजबूती के चलते दुनिया के केंद्र में भारत ही है। अभी विश्व की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की गिनती हो रही है। यदि निरंतर देश में विकास और दुनिया में हमारी यही धाक रही तो 2027-2028 तक हम निश्चित रूप से पहले या फिर दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था होंगे। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि भारत में मजबूत इन्फ्राक्चर और हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना।

Rohtak के सेक्टर-36 में गोच्छवाल प्रवासी सोसाइटी के परिवार मिलन समारोह में शामिल होने पहुंचे झज्जर के गोच्छी गांव निवासी कैप्टन हर्ष अहलावत ने यह बातें कहीं। विश्व बैंक सिंगापुर में रीजनल डायरेक्टर पद पर तैनात हर्ष ने कहा कि आज विश्व में इसलिए चर्चा हो रही है कि अंतरिक्षए रक्षा, तकनीकी, विज्ञान, सेना को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मोदी ने काम किया।

भारत के सशक्त बनने की खबरें हर रोज करती हैं गर्वित

अब विश्व के कई देश भारत के बढ़ते कदमों से चितिंत हैं, क्योंकि वहां आत्मनिर्भर बनने के लिए इतने ठोस कार्य नहीं हो रहे। पहले वहां के मीडिया में भारत में होने वाले बलात्कार, लूट व हिंसा जैसी खबरें चर्चाओं में रहती थीं।

अब खबरों में भारत के सशक्त बनने की खबरें हर रोज गर्वित करती हैं। राम मंदिर के निर्माण से आस्था, धार्मिक और अध्यात्मिक रूप से भारत की मजबूती का संदेश गया है। यही कारण है कि आज इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे हिंदू धर्म के देवी-देवताओं को मानने वाले देश भी बड़ी संख्या में भारत आना चाहते हैं।

धारा-370 हटने के बाद दुनिया के पर्यटन आ रहे हैं भारत, टूर पैकेज दे रही हैं कंपनियां

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कड़े निर्णयों की चर्चा करते हुए हर्ष ने कहा कि धारा 370 हटाई गई तो इसके दूरगामी परिणाम आने लगे हैं। पहले भारत में आगरा के ताजमहल जैसे पर्यटन स्थलों पर ही यूरोपी देशों के पर्यटन आते थे। जिसमें फ्रांस, इटली, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी आदि देश शामिल थे। मगर अब दुनिया के कई देशों में श्रीनगर व गुलमर्ग जैसे पर्यटन स्थलों के लिए टूर पैकेज दिए जा रहे हैं। इससे वहां रोजगार के द्वार खुले हैं और वहां भविष्य में लोगों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। भगवान बुद्ध के पर्यटन स्थलों पर काम हुआ तो मलेशिया, फिलिपींस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, वियतनाम जैसे बौद्ध समुदाय वाले देशों के पर्यटन आने लगे हैं। अब दूसरे देश भी यहां पर्यटक के रूप में आ रहे हैं। पहले यही देश भारत आने की कभी सोचते नहीं थे।

NDA से सेना में पहुंचे, : साल बाद आस्ट्रेलिया गए पढ़ने

हर्ष ने बताया कि उनकी चार पीढ़ियां सेना में सेवाएं दे रही हैं। पड़दादा के अलावा दादा मायाराम सेना में कैप्टन थे और पिता पिता राजेंद्र सिंह कर्नल पद से रिटायर हुए। 1991 में नेशनल डिफेंस एकेडमी(एनडीए) के माध्यम से सेना में पहुंचे। करीब छह वर्ष तक सेवाएं देने के बाद आस्ट्रेलिया गए। वहां से एमबीए (मास्टर आफ बिजनेस एडमिनिट्रेशन) और एमआइटी (मास्टर आफ इनफोर्मेशन टेक्नोलाजी) की पढ़ाई की। 2010 में विश्व बैंक के अमेरिका स्थित वाशिंगटन डीसी में नौकरी पाई। अब सिंगापुर में कार्यरत हैं। इससे पहले भी कई कंपनियों में कार्य किया।

ऋण मिलने का सीधा अर्थ ‘देश में हो रहा हैं विकास’

हर्ष ने बताया कि ऋण मिलने का अर्थ यह नहीं है कि कोई देश गरीब या फिर कर्जवान है। ऋण कोई भी संस्था उन्हीं को देती है जिनकी साख बेहतर हो और ऋण लौटने की पूरी गारंटी हो। ऋण मिलने का एक अन्य मजबूत पक्ष यह भी है कि शिक्षा, रोजगार, विकास वाली योजना-परियोजनाओं पर खर्चा होगा। पर्यावरण संरक्षण जैसे स्वच्छ पानी-हवा पर भी खर्चा होगा। भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था के उदाहरण दिए कि अमेरिकी बैंक के यहां 40 हजार कर्मचारी तैनात हैं। जबकि दूसरे देशों में इनकी संख्या बेहद कम है। उदाहरण के तौर पर विश्व बैंक के अलावा, आइएफसीए (इंटरनेशनल फाइनेंस कार्पोरेट), आइडीए(इंटरनेशनल डेवलपमेंट एजेंसी) और दो अन्य लीगल सेल हैं। यदि ऋण वापस नहीं करेंगे तो लीगल कार्रवाई भी होती है।

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