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देश में चुनावी लोकतंत्र के सात दशक, 14 से घटकर 6 रह गए राष्ट्रीय दल

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  • 1951 के आम चुनाव में 53 दलों ने लड़ा चुनाव, 14 को मिला था राष्ट्रीय दर्जा

नई दिल्ली। 1951 में देश के पहले आम चुनाव में कुल 53 दलों ने चुनाव लड़ा। इनमें 14 दलों को राष्ट्रीय दल के तौर पर मान्यता दी गई थी। 1951 से 2024 तक देश में 17 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। देश में चुनावी लोकतंत्र की सात दशक से ज्यादा लंबी इस यात्रा में राजनीतिक दलों की संख्या 53 से बढ़कर 2500 से अधिक हो गई है। हालांकि, राष्ट्रीय दर्जा रखने वाले दलों की संख्या 14 से घटकर 6 रह गई है।
चुनाव आयोग की किताब लीप ऑफ फेथ : जर्नी ऑफ इंडियन इलेक्शन में बताया गया है कि 1951 के पहले लोकसभा चुनावों से पहले 29 राजनीतिक दलों ने राष्ट्रीय दल का दर्जा मांगा था, जिनमें से 14 को यह दर्जा दिया गया। हालांकि, चुनाव के नतीजों के बाद 14 में से केवल चार कांग्रेस, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, सीपीआई और जन संघ ही राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बचा पाए। अखिल भारतीय हिंदू महासभा , अखिल भारतीय जनसंघ, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, ऑल इंडिया शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक-रुईकर ग्रुप, कृषक लोक पार्टी, बोल्शेविक पार्टी ऑफ इंडिया और रिवोल्यूशनरी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खो दिया।

1957 में हुए दूसरे आम चुनाव में राजनीतिक दलों की संख्या 53 से घटकर 15 रह गई। इनमें से 4 का राष्ट्रीय दर्जा बरकरार रहा। 1962 में तीसरे चुनाव में दलों की संख्या बढ़कर 27 हो गई और राष्ट्रीय दलों की फेरहिस्त में सोशलिस्ट और स्वतंत्रता पार्टी के शामिल होने से इनकी संख्या 6 हो गई। देश के कुल 17 आम चुनावों में 10 बार कांग्रेस सबसे बड़ा दल रही है। जबकि, भारतीय जनता पार्टी 5 बार और जनता दल व जनता पार्टी एक-एक बार सबसे बड़ी पार्टी रही हैं। 10 बार देश में कांग्रेस पार्टी का प्रधानमंत्री रहा है। 1951 से 1964 तक सीपीआई देश में मुख्य विपक्षी दल रही। बाद में पार्टी में टूटती गई और अब राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खो चुकी है।

1996 में 11वें लोकसभा चुनाव में 209 पंजीकृत राजनीतिक दल चुनाव में शामिल हुए


1992 में 10वें आम चुनाव में देश में सबसे कम दलों ने चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भाजपा, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, जनता दल, जनता पार्टी और लोक दल सात राष्ट्रीय दल शामिल थे। इनके अलावा बहुजन समाज पार्टी और सिरोमणि अकाली दल शामिल हुए। इसके बाद 1996 में 11वें लोकसभा चुनाव में 209 पंजीकृत राजनीतिक दल चुनाव में शामिल हुए, जिनमें आठ राष्ट्रीय स्तर के थे। 1992 के सात राष्ट्रीय दलों के अलावा समता पार्टी को भी इस चुनाव में राष्ट्रीय दल का दर्जा मिला था। 1998 में 176 दल शामिल हुए जिनमें भाजपा-कांग्रेस के अलावा बीएसपी, जनता दल, सीपीआई, सीपीएम और सीपीएम राष्ट्रीय दल थे।

1999 में 160 राजनीतिक दलों ने चुनावी अखाड़े में हुंकार भरी इनमें से भाजपा-कांग्रेस के अलावा बीएसपी, सीपीआई, सीपीएम, जनता दल सेक्युलर और जनता दल युनाइटेड राष्ट्रीय दल थे। 2004 में 230 दलों ने चुनाव लड़ा, इनमें से भाजपा, कांग्रेस, बीएसपी, सीपीआई, सीपीएम और एनसीपी को राष्ट्रीय दर्जा मिला था। 2009 में 363 पंजीकृत दल चुनाव में शामिल हुए, इनमें से भाजपा, कांग्रेस, बीएसपी, सीपीआई, सीपीएम, एनसीपी और आरजेडी को राष्ट्रीय दर्जा मिला। 2014 में 464 दलों ने चुनाव में भागीदारी की, जिनमें से भाजपा, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, एनसीपी और बीएसपी को राष्ट्रीय दर्जा मिला था। 2019 में 674 दलों ने चुनाव लड़ा, जिनमें से भाजपा-कांग्रेस, बीएसपी, सीपीआई, सीपीएम, एनसीपी और टीएमसी ने राष्ट्रीय दल के तौर पर चुनाव में भाग लिया। बहरहाल, 2024 के चुनावों से पहले टीएमसी, एनसीपी और सीपीआई राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खो चुके हैं। इस बार कुल 543 पंजीकृत दल चुनावों में शामिल हो रहे हैं। इनमें से छह भाजपा, कांग्रेस, एनसीपी, बीएसपी, सीपीएम और आाप को राष्ट्रीय पार्टी का दर्ज मिला है।

केंद्रीय चुनाव आयोग के 1968 के नियमों के तहत किसी पार्टी को राष्ट्रीय दल का दर्जा हासिल करने के लिए चार या उससे ज्यादा राज्यों में लोकसभा चुनाव या विधानसभा चुनाव लड़ना होता है। इसके साथ ही इन चुनावों में उस पार्टी को कम से कम छह फीसदी वोट हासिल करने होते हैं। इसके साथ ही उस पार्टी के कम से कम चार उम्मीदवार सांसद चुने जाएं। या फिर वह पार्टी कम से कम चार राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी होने का दर्जा हासिल कर ले। या फिर वह पार्टी लोकसभा की कुल सीटों में से कम से कम दो फीसदी सीटें जीत ले और जीते हुए उम्मीदवार तीन राज्यों से आएं, तो राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिया जाता है।

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