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मेक इन इंडिया की कामयाबी, भारत की वजह से चीन में गोभी के भाव बिक रहे इलेक्ट्रिकल सामान

By ANURAG BANWALA Apr 18, 2024 #china #india
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मेक इन इंडिया की कामयाबी, भारत की वजह से चीन में गोभी के भाव बिक रहे इलेक्ट्रिकल सामान

  • मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की हालत हुई पतली, मार्जिन 2 फीसदी से घटकर 0.05 फीसदी पहुंचा
    ग्वांगझू/वाशिंगटन। मेक इन इंडिया की कामयाबी से चीन की चिंता बढ़ती जा रही है। चीन में निर्माण क्षेत्र के कारोबारी खुद इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि उनकी हालत पतली है और हालात नहीं बदले, तो जल्द ही उन्हें धंधा बदलना पड़ेगा। चीन के ग्वांगझू शहर में इन दिनों इलेक्ट्रिकल सामान का सबसे बड़ा मेला लगा है, जहां गोभी-टमाटर के भाव में टीवी, फ्रिज और मोबाइल
    जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचे जा रहे हैं।
    टीवी बनाने की फैक्ट्री चलाने वाले वू हुआझान कहते हैं कि वे पहले निर्यात के लिए एक न्यूनतम ऑर्डर की शर्त रखते थे। निश्चित संख्या और तय मार्जिन से कम प्रॉफिट पर काम नहीं करते थे। भारत का नाम लिए बिना हुआझान कहते हैं कि कई बड़े देशों से अब बड़े ऑर्डर आने बंद हो गए हैं। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की हालत इतनी पतली हो गई है कि 3-4 साल पहले, जहां 2 फीसदी से
    ज्यादा प्रॉफिट मार्जिन पर काम करते थे, अब महज 0.05 फीसदी के मार्जिन पर काम करना पड़ रहा है। अब हमारे सामने छोटे-बड़े हर ऑर्डर को स्वीकारने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
    हुआझान कहते हैं कि यहां मेले में तो वे इलेक्ट्रिकल उपकरणों को गोभी-टमाटर के भाव बेच रहे, ताकि गोदाम खाली हों और किराया बचे। अगर ऐसे ही हालत चलते रहे, तो बहुत जल्दी मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बहुत सारे लोगों को अपना धंधा बदलना पड़ेगा। वे कहते हैं कि चीनी निर्यातकों को अमेरिका के साथ तनाव, यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से भी
    मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा विनिर्माण क्षेत्र की ओवरकैपेसिटी की वजह से भी निर्यातक त्रस्त हैं।
    स्पीकर व माइक्रोफोन बनाने वाली कंपनी एनपिंग सिटी शुआंग्यी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्रियल के सेल्स मैनेजर लोइस झांग कहते हैं, मेले को शुरू हुए पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन हमेशा की तरह इस बार विदेशी कारोबारियों की आवक कम है। इसकी वजह से धंधा भी मंदा ही चल रहा है। पिछले साल मेले में पहले ही दिन उनकी कंपनी को दर्जनों बल्क ऑर्डर मिले थे। इस बार पांच
    दिन में सिर्फ तीन लोगों के बिजनेस कार्ड मिले हैं। वहीं, जियांग्शू स्थित आउटडोर हीटर निर्माता फैक्ट्री के मैनेजर फान कहते हैं कि उनके ज्यादातर क्लाइंट अमेरिका और यूरोप से आते हैं। लेकिन, इस बार दोनों क्षेत्रों के कारोबारी मेले में खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। हमारे सबसे बड़े ग्राहक ने भी अपना ऑर्डर 25 फीसदी घटा दिया है। जबकि, कई बड़े
    ग्राहकों ने तो अभी तक ऑर्डर प्लेस करने का फैसला भी नहीं किया है।

चीन पर मार से बढ़ रहा भारत का व्यापार


अमेरिका के वाणिज्य मंत्रालय के पूर्व अधिकारी अरुण कुमार कहते हैं कि चीन के मौजूदा हालात की वजह से भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखला में बड़ा और विश्वसनीय केंद्र बनकर उभरा है। अमेरिकी सरकार के लिए वैश्विक बाजार से जुड़े मामलों को संभाल चुके कुमार कहते हैं कि भारत की आर्थिक समृद्धि बहुमुखी है। इसके पीछे भारत की वैश्विक अंतरनिर्भरता, निर्माण
क्षेत्र को प्रोत्साहन, विदेशी निवेस में वृद्धि, बड़ा कार्यबल जैसे कई कारण हैं। कुमार कहते हैं कि नॉमिलन जीडीपी के लिहाज से भारत आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जहां मध्यम वर्ग का आकार और आय तेजी से बढ़ रही है। भारत आज अपने नीतिगत फैसलों और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी है।

2047 तक एक उन्नत अर्थव्यवस्था बनेगा भारत


जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय में मेकिंग इंडिया एन एडवांस इकॉनमी बाय 2047 : व्हाट विल इट टेक सत्र को संबोधित करते हुए कहा, वैश्विक व्यवस्था और आपूर्ति शृंखलाओं के डायनेमिक्स आज भारत के पक्ष में काम कर रहे हैं। अगर भारत ने लगातार कारोबारी सुगमता पर जोर देना जारी रखा, तो निश्चित रूप से भारत 2047 तक एक उन्नत अर्थव्यवस्था बन सकता है। उन्होंने कहा कि
भारत को एक उन्नत अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कारोबारी सुगमता, आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं अधिक भागीदारी चाहिए। इन तीनों पक्षों पर भारत की प्रगति उल्लेखनीय है।

दुनिया ने समझे चीन पर निर्भरता के खतरे


वैश्विक विनिर्माण में चीन की हिस्सेदारी 25 फीसदी है। दुनिया ने कोविड महामारी के दौरान चीन पर अत्यधिक निर्भरता के खतरों को अच्छी तरह समझ लिया है। दुनिया का हर देश अब चीन का विकल्प चाहता है, ताकि चीन से आपूर्ति निर्भरता में कमी कर पाए। भारत ने पिछले एक दशक में जिस तरह निर्माण क्षेत्र के लिए खुद को तैयार किया है, उससे चीन का एक सहज विकल्प भारत बन रहा
है। खासतौर पर वैश्विक आपूर्ति शृंखला में लचीलापन लाने के लिए दुनिया के पास भारत के अलावा चीन का दुसरा विकल्प नहीं है।

भारत को मुक्त व्यापार बढ़ाना होगा


कुमार कहते हैं कि भारत फिलहाल दुनिया के ज्यादातर बड़े क्षेत्रीय मुक्त व्यापार समझौतों में शामिल नहीं। यह भारत के लिए एक बाधा है। अगर भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में तेजी से चीन की जगह लेनी है, तो ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों के साथ मुक्त व्यापार बढ़ाना होगा। ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप सीपीटीपीपी जैसे समझौतों भारत विचार कर सकता है। इसके
अलावा उन्होंने कहा कि भारत बहुत सारे द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते कर रहा है, इनसे भी भारत को लाभ मिलेगा।

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